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ओला और उबर जैसे एप्लिकेशन आधारित टैक्सी ऑपरेटरों की मनमानी की जांच के लिए राजधानी दिल्ली में एग्रीगेटर योजना का मसौदा प्रकाशित किया गया था। उनमें से, जो 50 से अधिक कारों के बेड़े के साथ आवेदन से ऑनलाइन टैक्सी सेवा, मोटरसाइकिल सेवा या ट्राइसाइकिल प्रदान करते हैं, उन्हें लाइसेंस प्राप्त करना होगा।

इस योजना के तहत उन्हें स्थानीय स्तर पर ऑपरेटिंग केंद्र खोलने होंगे। उन्हें भारतीय कानून के अनुसार अपने आवेदन को अनुकूलित करना होगा और 24 घंटे सहायता केंद्र भी संचालित करना होगा जहां उनकी कारों की निगरानी की जाती है। आपात स्थिति में उपभोक्ता और चालक को हिंदी और अंग्रेजी में संपर्क के माध्यम से सहायता प्रदान की जा सकती है। इस योजना को अब दिल्ली में लागू करने की योजना है।

दिल्ली में  करीब 2 लाख ड्राइवर ओला और उबर के

दुनियाभर में उबर और ओला जैसे ऐप आधारित एग्रीगेटर सेवाओं के लिए दिल्ली 10 शीर्ष मार्केट में है। ओला और उबर के करीब 2 लाख ड्राइवर दिल्ली में हैं और इस हिसाब से यह योजना इन एग्रीगेटरों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। परिवहन विभाग ने योजना का मसौदा सार्वजनिक कर दिया है और सभी सरोकार रखने वालों से 18 फरवरी तक अपनी राय या आपत्ति दर्ज करने का समय दिया गया है। स्कीम लागू होने के बाद दुपहिया, तिपहिया और कार के जरिए ऐप आधारित सेवाएं देने वाले एग्रीगेटरों को लाइसेंस लेना होगा। इस योजना से बसों को अलग रखा गया है।

लाइसेंस नहीं होने पर प्रति कार 25,000 रुपये का जुर्माना

योजना का पालन नहीं करने वालों को भारी जुर्माना भरना पड़ेगा । अगर एग्रीगेटर को निर्देश जारी होने के 3 महीने के अंदर लाइसेंस नहीं बनवाया तो उसे प्रति कार 25,000 रुपये जुर्माना देना होगा.