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पांच करोड़ रुपये की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों की चल-अचल संपत्ति का पता लगाया जा रहा है। प्रत्यक्ष रिश्तेदारों के बैंक खातों की भी तलाशी ली गई, लेकिन अभी तक भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग को कोई विशेष जानकारी हाथ नहीं लगी है। 

बुधवार को भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग ने क्षेत्रीय अनुरक्षण अधिकारी कविजीत पाटील, उपविभागीय जल संधारण अधिकारी श्रावण शेंडे और विभागीय लेखाधिकारी रोहित गौतम को पकड़ा था। आरोपी कविजीत सहित तीनों अधिकारी रिश्वतखोरी को लेकर पहले भी सुर्खियों में रहे हैं, लेकिन कभी उन पर कार्रवाई नहीं हुई। कविजीत पाटील ने रामटेक तहसील में भारी भ्रष्टाचार िकया है।

पंस सभापति ने तीन बार फटकारा था : 

योजना के तहत तहसील के भंडारबोड़ी, चकुरड़ा, खैरी बिजेवाड़ा, बोद्री और सितापार के तालाबों की दुरुस्ती और पुनर्जीवित करने का 50 लाख 53 हजार 838 रुपए का ठेका राहुल भनारकर नामक व्यक्ति को िमला था। 31 मार्च 2020 को काम पूरा हुआ। इसके 28 लाख रुपए भी ठेकेदार को िमल गए, लेकिन कोविड-19 के कारण सरकार ने इस योजना की निधि वापस ले ली। जिससे ठेकेदार का 22 लाख का बिल लंबित पड़ा रहा। यह बिल निकालने ठेकेदार ने कवीजीत पाटील के दफ्तर के कई चक्कर लगाए। कविजीत ने बिल पास कराने तथा फाइल आगे बढ़ाने ठेकेदार से 5 लाख रुपए रिश्वत मांगी थी। यह बात रामटेक के पंस के पूर्व सभापति गज्जू यादव तक पहुंचने पर उन्होंने कवीजीत तीन बार फोन पर फटकार लगाई। बावजूद कविजीत पर इसका कोई असर नहीं हुआ।